मंगलवार, 16 जून 2009

मै शब्द

अपनी उड़ान की उचाई से

देखना नीचे

असंख्य शब्द

तुम्हे समुद्र

पर तैरते हुवे दिखाई देंगे

कही पर बिखरे हुवे से

घर

रास्तो मे अनुपस्थित

मनुष्य के अभाव -

खाली -खाली सा -हिरदय को छुएंगे

मै हूँ शब्दों की हरी -हरी पत्तियों से भरा

एक वृक्ष

तुम्हारेविचारो के अनुरूप

एक काव्य

प्रयत्न करना

मुझे तलाशना जरुर

वैसे भी अब नही रहा दिल्ली दूर

तुम अब कविता हो

जिस जगह

या

जिस व्यक्ति के पास

नही होंगे तुम्हारे शब्द

उसमे दिखाई देगा तुम्हे

आडम्बर और झूठ

इन शब्दों के बिना

समझ मे नही आयेगा तुम्हे

किसी अजनबी का स्वरूप

तुम्हारे मन के पन्ने पर अन्कित हूँ

मै शब्द

शब्दों का समूह

तुम्हारे विचारों के अनुरूप

{किशोर }

2 टिप्‍पणियां: