सोमवार, 8 जून 2009

जो सोचते हो बोलते नही जो बोलते हो उसे सोचते नही

कया मै
पेड़ हूँ -जो सोचता है पर बोलता नही
क्या मै वो आदमी तो नही जो
दिन भर बोलता है ,बस बोलता है
पर
सोचता नही
पर इस सोचने और बोलने के बीच
प्यार दब कर -कराहने लगेगा
मैने सोचा नही था
बोलने और सोचने का अर्थ जान गया हूँ
मै तुम्हें चाहता हूँ
यही तो कहना है
फ़िर सोचना कुछ भी नही है
जैसा वोपुछे या
बताये -फ़िर बोलना है
फ़िर सोचना है
{किशोर }

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