सोमवार, 22 जून 2009

यहाँ पर बदली छायी है

आज यहाँ पहली बरसात की शाम आने वाली है

मैने सोचा था एक गीत लिखूंगा

पानी मे भिनगा हूवा अपना प्यार

तुम्हे भेजूंगा

पर तुमने तो पहले ही सब पानी कर दिया

वर्षा होने से पहले ही

मेरे पलकों को भींगा दिया

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