मंगलवार, 23 जून 2009

कर्म अंततः निष्काम ही होगा

सब माँ पिता
बच्चे
स्नेह से भरा अनेक परिवार
खुश होता मै
देख देख
आपस मे उनका प्यार

बछडे को दुलराती गाय
बच्चे को लिए घुमती
माँ बिल्ली चैन न पाय

पत्तो को चिकना हरा रखने के लिए
वृक्ष जड़ो से पानी पीता जाय

पति प्रेम मे डूबी पत्नी
ख़ुद को भूल सदा सुहागन कहलाय

पुत्र के लिए पिता
अपनी सारी पूंजी लगाय

प्यार सहित त्याग के अनुरूप
लेकिन जग मे प्रतिफल मिल न पाय

कर्म अंतत निष्काम ही होगा
चाहे फल पाने की कामना मन मे रह जाय

इसीलिए कहते है प्रेम वही सच्चा
जिसमे बदले मे चाह कोई न रह जाय

{किशोर }

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