रविवार, 21 जून 2009

अगले जनम मे मिलने से इनकार मत करना

मुझे सपना समझना

लेकीन

सदैव अपना समझना

मै जग रहित हूँ

लेकिन

तुम्हारे सहित हूँ

मै तुम्हारे मन की अन्तिम परत हूँ

जहा

पर

प्यार के प्रकाश की मोटी सतह है

मै तुम्हारी कल्पना का सुख हूँ

तुम्हारी चेतना का स्वरूप हूँ

मुझे अपने बाहुपाश मे ही रखना

अपनी अधर प्यास ही समझना

मै तुम्हारे चुम्बनों से रंगा रुख हूँ

मुझसे केवल प्यार करना

इस जन्म न सही

लेकीन

अगले जन्म मे मिलने से इनकार मत करना

{किशोर }

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