मंगलवार, 16 जून 2009

तुम नदी मै एक द्वीप

किरनोसे लिपटी
झिलमिलाती हुवी
प्यार से भींगी
चांदी के जल सी
तुम एक नदी
मै हूँ मौन
स्थिर एक द्वीप

मानो तुम हो जगमगाती मोती
और मै
एक सीप

तुम मेरे स्मरण की
एक लम्बी वक्र रेखा
मै जलता दीपक ठहरा
एक बिन्दुसा स्थिर

तुम कभी नम ले मेरा सिसकती
बिखर न जाऊ मै
सोच -सोच सहमती
चट्टानों के जग के करीब से
सुरक्षीत सरकती
हुवी गुजराती

तुम विरह की मूर्ती
मै तुम्हारा भग्यशाली मन मीत
तुम नदी मै एक द्वीप

{किशोर }

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