गुरुवार, 4 जून 2009

जेनी शबनम कीकविताओ के नाम

चाँद-सितारे दफ़ना दो यारों राजनीति... ज़िन्दगी तमाम हो जायेगी...


कविता ख़ामोश हो गई है... मुहब्बत ... पहला लफ्ज़ ... घर ...

अभिवादन की औपचारिकता...
आँखों में नमी तैरी है ... अच्छा हुआ तुम न आये... अनुत्तरित प्रश्न है...

ख़ुद पर कैसे लिखूं... मेरा अपना कुछ...
मेरी आजमाईश करते हो... सुलगती ज़िन्दगी


अनुबंध...



न तुम भूले...न भूली मैं...


क्या बात करें...



मैं और मछली...


रिश्तों का लिबास सहेजना होगा...

रिश्ते...


जिंदगी एक बेशब्द किताब...


वक़्त मिले न मिले...


बीती यादें...




चुनाव...नेता...

कामना...


हंसी, ख़ुशी और ज़िन्दगी बेकार पड़ी है...


अपंगता...
दुआ...



यकीन...



बुत और काया...



अवैध सम्बन्ध...



हम अब भी जीते हैं...


एक गीत तुम गाओ न...



कल रात...

कुछ पता नहीं...


खुशनसीबी की हंसी...




अपनी हर बात कही...




चुप...



लिखूंगी रोज़ मैं एक ख़त...
नफ़रत के बीज...काश ! ऐसा होता...


मैं आज ग़ज़लों की किताब बनूँगी...


ख़ुदा की नाइन्साफी...


अधूरी कविता...



थक गई मैं ...


रात का नाता...मुझसे...

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