रविवार, 24 मई 2009

१८७-प्रिय है

"प्रिय है "
उन्हें देखा नही कभी फ़ीर भी सीता और राम मुझे प्रिय है उनका नाम मुझे प्रिय है राधा और श्याम मुझे प्रिय है कभी लगता है -मीरा के एक्-तारा सा -बज रहा हूँ सुना नही पर -कृष्ण की बांसुरी की तान प्रिय है राधा जी की -छम छम -चाल प्रिय है वैसे ही -तुम से मिला नही कभी पर लगता है ख्वाब सी -तुम भी हो तुम्हारी हर बात प्रिय है मुझे राम -राम का नाम प्रिय है

_{किशोर कुमार खोरेन्द्र }

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