बुधवार, 20 मई 2009

१७८-पहरा

पहरा

१-बैठ कर
इंतजार के चेयर मे
सोच रहा हूँ
क्या -
यही होता है प्यार मे
२-भूल जाते है स्वयं को
खो जाते है
उनकी याद मे

३-सरकता हुवा एक् पत्ता
आँगन से आया
मुझे
कुछ कह गया
उसके हाथो के
कोमल स्पर्श सा -
छू गया

मेरी यादो मे
उसका नाम -
पहले आता है
या -खुबसूरत चेहरा
बताना मुश्किल है
अब तो
मेरी रूह तक है

उनका -पहरा

{किशोर }

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