रविवार, 31 मई 2009

नाम और आकार

नाम और आकार देखना तुम्हारे पाँव कांच केटुकडे मे न पड़ जाए मुझे -बहुत दर्द होगा कोईबबुल कांटे की तरह तुम्हारी बाहों को खरोच न दे मै छिल जाऊंगा अगर कोई सपना तुम्हारा टूटा हुवा आँगन मे मिल जाए तोमुझे बता देना उसे मै -बीज की तरह -फ़ीर बो दूंगा शायद तुमने मुझे .....?क्या .....किसी ने नही देखा होगा मै तुम्हारे सबके हमेशा पास हूँ बहुत करीब इतने समीप की मुझे भुला कर ही तुम जीसकती हो जैसे मै जल होऊ पीकर मुझे तुम्हें भूलना तो होगा ही प्यार के अनेक नाम और आकार है उनमे से जो चाहो मुझे समझ लो {किशोर कुमार खोरेन्द्र }

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