रविवार, 31 मई 2009

यमुना तीर

यमुना के तीर 1- बिदा कर दोस्तों को लौटते -लौटते अब किसे दूंड रही हो प्लेटफोर्म मे २-माल मे सड़क मे या बाजार मे मुझे मत खोजो ३-रेस्टोरेंट मे दोसे की खुसबू की तरह मुझे मत सुंघा करो ४-मै कोई रसोगुल्ला नहीजो तुम्हें किसी डिब्बे मे बंद होकर -मिल जाऊ ५-मैतुम्हारे -दफ्तर मे फाईल से गिरा हुवा एक् पन्ना नही हूँ जो तुम्हारे हाथ लग जाऊ ६-या किसी सिटी -बस मे तुम्हारी बगल मे बैठा -नजर आउ७-मै तो जंगल का एक् फूल हूँ पग -डंडियों पर उड़ता हुवा धूल हूँ पर्वतो के पीछे से -उगता हुवा सूर्य हूँ ८-एक् बहुत पुरानी वो किताब हूँ जीसे बस पढ़ते रहने का ही मन करता है ९-यदी तुम्हें मुझसे मिलना है तो चली आना -यमुना के तीर बहे जहां -ओढ़कर कदम्ब की छवी चांदी सी झिलमिलाती नीर {किशोर }

कोई टिप्पणी नहीं: