सोमवार, 18 मई 2009

१६९-कविता -राधा रानी को मनाऊ कैसे

१-राधा रानी
को मनाऊ कैसे
मैने ही तेरी मटकी फोडी
बताऊ कैसे

२-एक कांटा बबूल का
तेरी राह मे
मैने ही रखा था
समझाऊ कैसे

३-यमुना तट पर
कदम्ब की डाल से
लटकी
झूले की रस्सी
मैने ही ढीली की थी
अब
गिरने पर उसके
उसका गुस्सा देख
ताली बजाऊ कैसे

४-गोपियों के संग
रास रचाया
जान गयी राधा
अब अपना यह भेद
छिपाऊ कैसे

५-हे राधा
रानी
तू है
मुझे सबसे प्यारी
तुझ बिन
कभी न होगी पूरी

मेरी कहानी
{किशोर }

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