रविवार, 31 मई 2009

१-वृक्ष से
फल
और
नदी से
जल
वृक्ष और नदी से -यह कहने मे
तो कोई हर्ज नही है की -
मै तुमसे प्रेम करता हूँ
२-उत्तर मे वे और फल और जल देते
है परकहते कुछ नही
३-मुझे चाहिए शब्दों से बने उत्तर
मै मनुष्य हूँ
मुझे मन भर शब्द चाहिए
शांतिमय परिणाम नही
४-मै भगवान् की मूर्ती के पैरों पर गिर पङता हूँ
रोता हूँ गिड़गिड़ता हूँ
वे देते है मुझे मौन के बगीचे से तोड़कर -
एक् और शांतिमय जीवन
५-पर मुझे उनका मूक आर्शीवाद
नही
चाहिए होता है प्यार का
सस्वर उच्चारण
६-लेकीन हर हाल मे या परिणाम मे
मुझे तो यही लगता है कि-
प्रतिउत्तर मे प्रेम इस जग सरोवर के पंक मे
खिले हुवे कमल की एक् चुपचाप -मुस्कराहट


है
७-या
इस ब्रह्माण्ड के एकांत के जंगल की
विराट सकारात्मकसजीव -मौन स्वीकृति है
शायद तुम भी उस स्वीकृति की
एक् अनुकृति हो


[किशोर कुमार खोरेंद्र }

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