मंगलवार, 12 मई 2009

१५०एक सुंदर लड़की

एक सुंदर
भोली-भली लड़की
इस हुगली नदी के हावडा पुल पर

कई बार
आकर
जाकर -बडी हुवी है
पुल जीतनी लम्बी
अपनी इस
हजारो बार की यात्रा मे
शालीमार से वेलुर मठ तक के
बहते जल को अपनी आँखों की
अंजुरी मे भरकर
उसने
कई बार पीया है

अब
वह लौटते हुवे नाविकों से
पूछती है
समय की नदी मे
प्रवाहित
हो चुका उसका बचपन
कही उनके जालो मे
सोन -मछरी
की तरह -फसकर लौट तो नही आया है
वह उस युवती को भी
भीड़ के इस महा -नगर मे
तलाशती है शायद
उसके सपनो से मुलायम टूटे हुवे पंख ही मिल जाए
और
वह फ़िर
अपनी माँ
औए पिता की आँखों से
देखना शुरू करे
हुगली नदी को
उसके विस्तार को
हावडा के पुल पर चलते हुवे
उसे
फ़िर देखे बेलूर मठ और शालीमार

{किशोर कुमार खोरेन्द्र }

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