रविवार, 10 मई 2009

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Girish Joshi
"मुज़ से अनजान मुज में रहता है, कैसा इन्सान मुज में रहता है| मैं तो मुश्किल हूँ जांक कर देखो, मुज़ से आसान मुज़ में रहता है|"
September 1
jogigiri@yahoo.co.in

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