शुक्रवार, 15 मई 2009

मनोरम काव्य

१-आप्नेर मूर्ति
काछे
चुप करे आछे {अपनी मूर्ति के पास चुपचाप खड़ी है }

२-नि:शब्द ,निर्जन पृथ्वी जेन {निस्तब्ध निर्जन पृथ्वी जैसी लगती है }

३-हेसुन्दरी

४-महाचेतनार गोल गवाक्षे {महा चेतना के गोल गवाक्ष से }

५-मै तुम्हे नित्यी बसे देखि {मे बैठ कर नित्य तुम्हे देखता हू }
६-जैसे किसी स्मरने {जैसे किसी याद मे }

७-ते {तुम}
८-खोयी हुवी हो

९-से कोथाय {वह कहाँ है }

१०-जिसे तुम प्यार करती हो

११-क्या वह श्वेत शंख है

१२-जिसकी मधुर आवाज
१३-मे तुम

१४-shankha सी -

१५-इस दुनिया के

१६-सैकते एसे {बालू पर }

१७-एसे हीचुप चाप जैसे पडी हो

१८-तोमार दइके ताकाले {तुम्हारी or देखते ही }

१९-उत्तरेर जेन आभास पाई {मानों उत्तर का आभास मिलता है }

२०-हे सुंदरी

२१-तुमि एई कवी {तुम इस कवी की }

२२-मनोरमा काव्य {सुंदर कविता हो }

{किशोर कुमार खोरेन्द्र }

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