मंगलवार, 21 अप्रैल 2009

१२५-सागर तो बन ही जाओगे

{" सागर तो बन ही जाओगे "}

१-लिखते -लिखते
मै
अक्षर
बन गया
मुझे
दुन्डो
अब ,...
शब्दों मे
खोजो
किताबों मे
पन्नो के बीच
कही दबा रह गया
२-लोग चलते रहे बस्
सा
सडको पर
हंसते रहें
ग्रामीण
लडको पर
मुझे तलाशने

उतरा कोई
स्कुल के पास ...
मै अन -पढा रह गया
३-लिखते -लिखते
मै
अक्षर बन गया
४-मुझे किसी ने
जाना नही
मै
नीड़ मे
तिनको सा
रह गया
लोग उंघते ही
रह गये
ट्रेन मे ......
मै
छोटे से गाँव के अंधेरो सा
गुजर गया
६-मै अगर
मिल जाऊ ....?
तो
उसे
"बीज -मन्त्र "

समझना
मै
एक् बूंद
उदार
प्यार हू
मुझे अगर
छू लीये
तो
बूँद
से
...

सागर तो बन ही जाओगे {किशोर कुमार खोरेन्द्र }

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