शनिवार, 4 अप्रैल 2009

हथेली सी पत्तिया

कविता के शब्दों को दानो की तरह
बिखेर जाती है मेरे आँगन मे
हर सुब्हह
बहुत सी चिडिया
कविता की पंक्तिया
आप से आप
बनती जाती है जैसे
किसी पौधे की नार पर ऊग आती है
आप से आप
मेरे घर की छत पर
हथेली सी पत्तीया .{किशोर कुमार खोरेन्द्र } ....

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