रविवार, 12 अप्रैल 2009

११६-नये अक्षर ,नयी कवीता

४-जलने दो
जंगल को
फीर आयेगा
मौसम
लिख जायेगा
नदी की रेत
पर खिची हुवी
पानी की लकीरों मे
नये अक्षर
नयी कविता
उसे मत रोको
जो
पहाड़ से
उतर रहा है {किशोर कुमार खोरेन्द्र }

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