रविवार, 12 अप्रैल 2009

११६-नये अक्षर ,नयी कविता

१-मत रोको उसे
उस आदमी को
जो दर्द के पहाड़ से
लावे की तरह उतर रहा है
उसके
ओंठ सील हुवे है
हाथ कटे हुवे है
पांवो मे बेडिया है
उसकी देह मे दुःख के कांटें उग आये है
सारे अँधेरे को एकाकी होकर पीते आये
उस रक्त-तप्त आदमी को -मत रोको

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