गुरुवार, 23 अप्रैल 2009

१२८-आराम से

-मरने के बाद भी
आता होगा गुस्सा
मरने के बाद भी
होती होगी
सचमुच मे
मरने की इच्छा
बेटा
बेटी
मित्र
सब भूल जाते है
उसका मरना .....
कब्र के भीतर
और
एक कब्र सा
रहने मे
उसे अच्छा लगता होगा
उसे
उससे पहले मर चुके
साथी की
याद आती है
उसे फ़िर लगता है
वह
जीवीत ही कब था ॥?
उस घर मे
और
इस घर मे
अन्तर ही कहां है
तब भी
अदृश्य था
उसका नाम
वो भी.. संक्षिप्त....! -लोग जानते थे
जाती या धर्म
प्रान्त या देश
रंग या वेश
वह पुरूष है -बस् इतना ही
था वह
आज की तरह
वह
पहले भी अकेला था
पता नही
जीवीत लोग क्या काम करते है
प्यार बड़ता ही नही
कम होता जा रहा है
मनुष्य ...?
मन नही
धन ...होता जा रहा है
उन्हें
इसलिए मरने तक की
फुर्सत नही है
इसलिए उसने सोचा है
मरने के बाद
वह
एक बार फ़िर -
आ-रा-म - से ..... ? मरेगा !
{किशोर कुमार खोरेन्द्र }

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