सोमवार, 6 अप्रैल 2009

१११-सर्वश्रेष्ठ है मनुष्य

१-१-कविता !
हमें लिखाती है
या
हमें लिखती है
मै उसके लीये हू
मात्र एक् शब्द
इसलीये पढना है
हमें
खुदको
और
अब तक की सब कविता
सब कहानिया
सब उपन्यास
सारे नाटक
सुन लेना है -संगीत
देख लेना है सारे चरित्र
सचित्र
जीवन के रंग-मंच पर हो रहे
तमाम -नृत्य

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