बुधवार, 22 अप्रैल 2009

१२६-सागौन वृक्षो के पास

१-मै नही
सड़को पर घूम आती है
मेरी चप्पले
झोला ले आता है
बाजार से खरीद कर
सब्जी
लोगो को देखता
नहीं
मेरा कला चश्मा
कपडे की जगह
कभी -कभी
मै टंगा होता हू
धुप मे सूखता हूवा
लोग मुझे नही -
पहचानते है मेरी कमीज को
मै
एक
पुरे आदमी की तरह
कभी भी
लोगो के सामने नही आ पाता
इसलिए
हर मित्र की जेब से
मै
बरामद किया जा सकता हू
हर बार -अलग -अलग रूप मे

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