गुरुवार, 23 अप्रैल 2009

१२९-महानदी के उदगम सिहावा मे

१-मै
और
सीडीयाँ
एक साथ
चड़ते गये सिहावा -पहाड़
कुछ और दूर -दूर
जाता हूवा दिखायी दिया
नीला आकाश
हाथ मिलाने को ,वृक्षो की टहनियों से ,
उत्सुक पत्ते
हरे -हरे आते रहे
बार -बार
पास -पास
थके नही मेरे पाँव
नीचे
दूर
रेखाओं सी सडको
फ़िर
स्केल -पट्टी सी मेडो
और पग-डंडी -यो
के किनारे
कतार बद्धः घरो से
घिरा दिखाई दिया गाँव

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