सोमवार, 20 अप्रैल 2009

तुम्हारा ही पर -प्रतिक्रिया

१-काफ़िर:

khoobsoorat kavitaayen thi hamesha ki tarah

२-ratnesh:

शुप्रभात गुरु जी कैसे हैं
आपकी यह नई रचना बहुत ही खुबसूरत है खाश कर के एक अजन्मे बेटे का माँ से संवाद तो मार्मिक है यह पंक्तिया उन लोगो के लिए मार्गदर्शक हो जो एक अजन्मे संतान को मार देते हैं

३-

PAWAN ARORA:

aap ko parnaam bahut khub sir मै तुम्हारा ही अंश
सदेह
सदैव
के
लिए होना चाहता हू
मै तुम्हारा
अमृत पुत्र
प्रतिरूप
होना चाहता हू .{

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