मंगलवार, 10 मार्च 2009

प्रतिक्रियाये

DURG SINGH:

Respected Kishor Ji sir,
Lots of Holi Greetings. May your poem writing instinct prosper furth

कवि धीरेन्द्र:

आपके शुभ आशीर्वाद एवं सहयोग के लिए सादर धन्यवाद | हर व्यक्ति बिछा -बिछा सा ...लगाना चाहता गले ...भूलकर शिकवे गिले ...आदमी के भीतर शहर अपना लग रहा ...भुलाकर आज हादसों के सिलसिले .{किशोर कुमार}

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