मंगलवार, 3 मार्च 2009

पूछते है मित्र

धरती पानी की एक बूंद सी ...जल में उसके हम सब घुले हुवे .....आँखों में सबके एक सा सपना है भरा /....पूछते हो मित्र मुझसे मेरा पता ....घोसले के भीतर ..चिडियों सा रहता हू सदा //{kishor कुमार खोरेन्द्र } ..

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