शुक्रवार, 20 मार्च 2009

१००-एक कविता के बाद भी

एक कविता के बाद भी
बची रह जाती है
मेरे पास लिखने के लिए
या फीर
पढ़ने के लिए -
अनेक कविताएं .......
क्या कविताये भी मुझे
धुडती है - जैसे
गुलाब धुड लेता है एक पौधा
या
एक पौधा धुड लेता है अनेक गुलाब
घोसले को चाहिए चिडिया
और चिडियों को चाहिए घोसला
तो क्या स्कुल को मिल जायेंगे वो सारे बच्चे
जिन्हें जानना है सच को
और सच को मिल जायेंगे वो स्कुल जहां
पढना है बच्चो को -
तभी तो कविताओ को मिलेंगे लोग
और लोगो से मिलेंगी कविताए {किशोर कुमार खोरेन्द्र }

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