गुरुवार, 5 मार्च 2009

विचार

जो सबसे निकटम व्यक्ति ,या .वस्तु ..होते है ..जैसे स्वयम व्यक्ति .उसकी देह ,..माता-pita , भाई -बहन ,आदरणीय गुरु यहाँ तक की अपनी आत्मा ....या ईश्वर..फ़ीर अपना खुद का घर ही क्यों न हो ..व्यक्ति इन्हें नजर अंदाज कर ..दूर के व्यक्तियों और वस्तुओ मे ज्यादा आकर्षण महसूस करता है ....आपनी पत्नी से ज्यादा सुंदर , दूसरे की पत्नी ..लगती है ...यह मनो -विज्ञानं ..है तो गलत ..परन्तु प्रचलन मे यही है ...लेकीन ..बुद्धिमान मनुष्य ....को अपनी आत्मा ..अपने माता -pita ,..अपने गुरु .......और अपनी धर्म -पत्नी तथा अपने सभी मित्रो मे रब ..दीखता है --व्यक्ति स्वयम ही अपना MITR है at: उसकी अंतरात्मा ----के अनुसार ....पहले खुद मे खुदा होना चाहिए .{kishor कुमार }thank u

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