शुक्रवार, 20 मार्च 2009

९९-खत्म नही होती शायद यात्रा

कहानी मे
बच्चा सुनते -सुनते
ख़ुद बन जाता है खरगोश या कछुवा
लेकिन
सचमुच मे
जीवन की भाग -दौड़
खरगोश की तरह है -
तेज बहुत तेज
रफ्तार है जीवन की
जो बिछड़ जाते है
उन्हें
याद नही कर पाते
जो मिलते है उनसे भी
परिचय -नम मात्र के लिए हो पाता है
किसी किताब के सारे पृष्ठों की तरह हम

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