शुक्रवार, 27 मार्च 2009

मुझे तुम याद हो गए

कितने दिन और कितनी ..रात हो गए
भूलने की कोशिश मे
मुझे तुम याद हो गए /
मै पुरूष आधा
मन मेबसी रहती
इसलिए -
सदैव एक पवित्र राधा
राधा सी तुम एक मन्त्र -जाप हो गए //
रूप नही ,आकार नही
देह नही ,साकार नही
चेतना मे प्रेम का
हम एकाकार भावः हो गए ///
हर आँखों मे
चित्र अनंत समाया
हर मन के पास मगर
प्यार लौट कर
अंत मे एक -जैसा आया
उस सच्चे प्यार को पाकर
लगता है
हमे -तुम भव -सागर पार हो गए //// {किशोर कुमार खोरेन्द्र }

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