शुक्रवार, 6 मार्च 2009

प्रतिक्रियाये ....औरत ,अमर होली ,अनंत से अनंत तक ,आतंकित आदमीकविताओ पर

१----VINOD BISSA:
" धुप की तरह आदमी भी ...मेरी पकड़ से बाहर है ....." क्या शानदार बात कही है आपने वाह ....बहुत खूब --------२---VINOD BISSA:
बहुत शानदार किशोर जी .... ....३------Girish:
आशीर्वाद के लिए झुके हुवे ....उसे ..सदियों बीत गये ......is good. .........४------мєєиα:
Jai Gurudev Kishorji accha laga aapka scrap padkar .. acchi baat hai .. hum phir milenge ...........५...........गार्गी..thanks aapko kee aap ne itni sundar liens send kee.bahut hee bahut pyari hain, dil ko chu lene waliaapki toh books nikalti hongi!!! .......६--------bhavana:
wow a v v v beautiful one dear, thanks a lot for it .......

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