सोमवार, 16 फ़रवरी 2009

मेरा परिचय

१-पता नही वो आदमी है या एक् शब्द ..या अभी -अभी ..पौधे मे ..खीला हुवा कोई फूल .या फ़ीर ओंस बूंद मे झाकता हुवा मेरा चेहरा २-हर तरफ मेरीही परछाई है ..मै चाहता नही ..फ़ीर भी .सर्वत्र दिखाई देता हू ..नदी की देह सा ..मै ..समूचे आकाश को ओड़ कर बहता हू ..३-इसलीये मै कहता हू ..मुझे धरती कह लो ...या पहाड़ से उतरती हुई ..एक् पगडंडी ही मान लो ..या फ़ीर मन्दिर मे जलते हुवे ..दीपक का दर्द समझ लो .. ४-मै सीडीयों की तरह उतरा हुवा हू ..सबके इंतजार मे ..प्यार सबमे ..सबके लीये ...है -प्यार एकाकी हो नही सकता {kishor कुमार खोरेंद्र }

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