सोमवार, 16 फ़रवरी 2009

कवी -मित्र

१-जैसे एक kavi mitr ...सौप गया हो टोकरी में भरे फूलो कीतरह अपनी ..कविताओ से भरी प्रिय डायरी ....और वह अब भी डायरी के पन्नो के ..हाशियों पर फैले हुवे बूंद में स्याही की तरह हो वः उपस्थित / २-मुझ ऐसा ही लगता है ॥कविताओ में जैसे शब्दों की तरह ..जड़ाहुवा वह रह रहा हो सुरक्षित ...अनलिखी कविताओ के इंतजार में ..कोरे पन्नो के बीच ...पन्खुरियो सा दबा- दबा आज भी जैसे चिन्तन में हो लिप्त .. ३-अनाम कवीता की पंक्तियों के बीच ..जैसे मछली की तरह ..छंद की पकड़ से ..बाहर हो गये एक शब्द सा हो मुक्त ...किसी बर्थ में ..भूले रह गये ..खादी के रुमाल की तरह ....या टूटे हुए फूलों की तरह ...एक पवित्र याद रह गया मुझे मेरा कवी MITR ..{किशोर कुमार खोरेंद्र }

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