शनिवार, 28 फ़रवरी 2009

एकांत में उसी गीत को ...

नदी  पहाड़  जंगल तब भी थे....
.बिलकुल आज की तरह ....
तब से संगीत की तरह बहती आई है हवा 

पत्ते शाखाओं  पर उगना सीख रहे  थे  ...
कलियाँ टहनियों पर महकना सीख रही थी .....
सूरज को पहली बार तब देखा था ..नदी ने .....
और कोहरे की घनी परत को हटा कर .....
आकाश ने नदी को चूमा था ..पहली बार ...
तब से संगीत की तरह बह्ती आई है हवा ...

.नदी ..पेड़  और चट्टान की बातो को सुनकर -
हवा गुनगुनाने लगी थी ..एक गीत ..
वह पहला गीत आज भी जंगल की खामोशी में  
पत्तियों की हथेलियों पर अंकित है  ...

एक लहर हँस  रही थी लड़की की तरह .
चट्टानों  से लिपट कर  झूम रही थी ...
उसकी मुस्कुराहट का पीछा करते -करते ...
सुबह से दौड़ती ..धुप थक गयी थी ...
 चांदनी रात की गोरी बांहों में  
वह  हँसीं ..समा गयी थी .....
और जंगल की कोख से ..
गाँव ने जन्म लिया था ...
संगीत की तरह तब भी  बह  रही  थी हवा  

हवा के ओंठो से निकले ..
संगीत के सातों स्वरों को अलग -अलग गाँवो ने ..
अलग अलग सुनकर ...
अपने गीत के लिये  ..चुन लिया था ..एक -एक शब्द .-
शब्द मौसम मे घुलते रहे ..भाषाओ में  बदलते रहे ...
और ,... ,...मौसम बदलता रहा ..
हर पेड़ ..हर पत्तियों को ..
हर पत्थर ,हर आदमी  का ,रूप निरंतर निखरता रहा ..
और फिर  बन गया शहर 

मीनारों ,दीवारों ,सड़कों से घिरा     हुआ  -  शहर 
बहुत पीछे छोड़ आया पेड़ की तरह नग्न शरीरो को ..
उन गीतों को -जिसे  हवा ने सिखाया था आदमी को .....
और हवा हैरान है उपासको को सीढियों पर 
भग्न मन्दिरों की तरह तितर -बितर पाकर 

हवा की सांसो में  आदमी ने जहर भर दिया है ...
अब हवा लौट जाना चाहती है 
जंगल के एकांत में  उसी गीत  को  
सुनने  के लिए  -गाने के लिए  

किशोर कुमार खोरेन्द्र 

8 टिप्‍पणियां:

Udan Tashtari ने कहा…

हिन्दी चिट्ठाजगत में आपका हार्दिक स्वागत है. नियमित लेखन के लिए शुभकामनाऐं.

एक निवेदन: कृप्या वर्ड वेरीफिकेशन हटा लें तो टिप्पणी देने में सहूलियत होगी.

संगीता पुरी ने कहा…

बहुत सुंदर…..आपके इस सुंदर से चिटठे के साथ आपका ब्‍लाग जगत में स्‍वागत है…..आशा है , आप अपनी प्रतिभा से हिन्‍दी चिटठा जगत को समृद्ध करने और हिन्‍दी पाठको को ज्ञान बांटने के साथ साथ खुद भी सफलता प्राप्‍त करेंगे …..हमारी शुभकामनाएं आपके साथ हैं।

नारदमुनि ने कहा…

narayan narayan

रचना गौड़ ’भारती’ ने कहा…

ब्लोगिंग जगत में आपका स्वागत है।
शुभकामनाएं।
कविता,गज़ल और शेर के लि‌ए मेरे ब्लोग पर स्वागत है ।
मेरे द्वारा संपादित पत्रिका देखें
www.zindagilive08.blogspot.com
आर्ट के लि‌ए देखें

kishor kumar khorendra ने कहा…

rachana ji shukriya

kishor kumar khorendra ने कहा…

sangita ji dhnyvaad

kishor kumar khorendra ने कहा…

udhan tastari ji shukriya

kishor kumar khorendra ने कहा…

narad muni jii shukriya