शनिवार, 28 फ़रवरी 2009

कविता -अंश

१-पता नहीं कब उस आखरी आदमी का जन्म होगा ...जिसकी कवीता आखरी होगी और ...जीसे सुनते ही सारे लोग एक् हो जायेंगे ...लेकीन कवीता सुन रहे मेरे दोस्तों ..जान लो ..-पहली कवीता की तरह ही होगी वह आखरी कवीता / .......................२-.....एकांत के एकांत मे ...मै रहता हूँ ..निज -प्रान्त मे ..../बरसों या सदियों बीत गये ..न रह पाया किसी के साथ मे ..//जैसे चलती चीटियाँ पत्तो को नही काट रही ///इसी तरह आत्मा को भी देह बूंदों की परवाह नही ////{kishor कुमार } ..........3-मै ठहरा हुवा शरीर हूँ ..इसका अहसास कभी नहीं होता मुझे ...लगता है मेरा कद मेरी देह से बढा है ...किसी डिब्बे मे बैठा हुवा मेरा शरीर भागता चला जाता है रेल के साथ ....और मै छुट जाया करता हूँ अक्सर ...किसी जंगल मे उगे हुवे हजारों सागौन वृच्छो के पास ...{कविता अंश..kishor } .................४-......एक् बूंद प्रेम हूँ मै ....पर तेरे विरह का ,सागर जितना अहसास ....मुझे गिरने दो प्रभु !तुम्हारे चरण कमल मे ....नयनो मे तो सबके बनकर रहती ही हूँ मै प्यास ..{kishor कुमार }.

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