मंगलवार, 17 फ़रवरी 2009

मेरी पत्नी ...

१-उसके पास ..उसके साथ रहा ...जैसे मेरी देह मेरे पास ..मेरे साथ रहती है ...अपने भीतर के आकाश में ..घूम रही पृथ्वी की तरह ..खोजता रहा ..उसके पास एक सूरज ....२-उसके पास उसके साथ रहा ..जैसे पृथ्वी अपने सूरज के साथ रहती है ..लेकिन उसे पुरी तरह से मालूम नही था ..की ..वह मेरी देह है ..वह मेरा सूरज है ..उसे पाकर मै विदेह हो गया था..उजाले से भरा ..पुरा आकाश हो गया था ..३- मै अगर पत्ता था तो वह मेरा हरापन थी ..मै यदि फूल था तो वह मेरा रंग थी ..मै यदि धुप था तो वह मेरी आंच थी ..४-लेकिन क्या मै उसका सूरज ..उसकी देह बन सका हू ...{kishor कुमार खोरेंद्र }

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