सोमवार, 16 फ़रवरी 2009

यह भी एक कविता है ...

किसी कवि  की कविता  पढ़कर  ..
तृप्त होना कविता  है ,..
कविता  न लिख पाऊँ  ,
पर ..कलम लेकर बैठ  जाऊं  ,...
और कोरे पृष्ठ  को देखता रहूँ  ,.
यह भी एक कविता  है ...
कविता  शब्दों में ,कवि  में 
या किताबो में बंद नही है 
कविता  तो सम्पूर्ण  मनुष्य  के भीतर है ,..
समय से उसका अनुबंध है ....
आखरी  कविता  का ...
सबको इंतजार है ...

किशोर कुमार खोरेंद्र

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