सोमवार, 16 फ़रवरी 2009

अपनी ..धर्म -पत्नी के लिए ...

1-तुम्हारे आंसुओ को छत पर रख आया हू ॥सुख को उतरने दो ..धुप की तरह ।सीढियों से आंगन तक ..खीलने दो पुष्पों को ..तुम्हारे विश्वास के गमलों मे ..रंग लो दीवारों को हरी इच्छाओ और पवित्र श्वेत -कामनाओ से .. २-दुखो को धोकर तार पर सुखा दो ..टंगे रहने दो उन्हें ..बरसों तक ..बेटे के लीये उमढ आये प्यार को ढक कर रख दो ..कही वह ठंडा न हो जाये ..बेटी के मायके आने से पहले ..पसंद कर लो साडिया और रंगीन चुडिया... 3-अडचनों को कह दो ..अब न आये इस घर मे चीटीयों की तरह झुंड मे दुबारा ..ताकी .मीठास बनी रहे ..दाल मे नमक की तरह .. ४-सहेज कर रखे रहो ..उन बर्तनों को जीनकी आवाज ..सडक तक न जाये ...एसे कुछ कपडे ..जिनके फटने से ..शर्म को लाज न आये .. ५-कुछ दाल .कुछ चांवल और दो रोटियों से भी ..ज्यादा जरूरी है ..अपने छोटे से बगीचे मे ..दूब की तरह ..हरे -हरे शब्दों को उगाना ...तुलसी की जडो मे पानी की तरह भर जाना ..चुराये इससे पहले ..गुलाब बच्चे को सौप देना ...घृणा .प्यार मे तब्दील न हो जाये ..तब तक पढोस मे ठहरे रहना ..यही तो प्राथना है और पूजा ...{kishor कुमार खोरेंद्र }

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