मंगलवार, 17 फ़रवरी 2009

गूंजा मौन

गूंजा मौन यहाँ ....एकांत कलरव सी आहट है ..इस नीड़ की अमराई मे ..हर तिनको का svagt है ..खोजता चिडिया को .. उड़ती हुवी ..जैसे .. एक् पंख हो ..धुप सी यहाँ ठहर जाओ ..एक् टुकड़े आकाश सा उतर आओ ......{kishor कुमार खोरेंद्र }

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